• आजादी का अमृत महोत्सव और वंचित तबकों की जीवन-प्रत्याशा

    Author(s):
    Pramod Ranjan (see profile)
    Date:
    2022
    Group(s):
    Indian Economy, Sociology
    Subject(s):
    Life expectancy, Dalits, Indigenous peoples, India
    Item Type:
    Article
    Tag(s):
    Social and Behavioral Sciences, Adivasi, obc, Azadi Ka Amrit Mahotsav, 75 years of India's independence, women life expectancy
    Permanent URL:
    https://doi.org/10.17613/396h-9152
    Abstract:
    यह अध्ययन बताता है कि भारत में ऊंची कही जाने वाले जातियों और अन्य पिछड़ी, दलित, आदिवासी जातियों की औसत उम्र में बहुत अंतर है। सामान्यत: आदिवासी समुदाय से आने वाले लोग सबसे कम उम्र में मरते हैं, उसके बाद दलितों का नंबर आता है, फिर अन्य पिछड़ा वर्गों का। एक औसत सवर्ण हिंदू इन बहुजन समुदायों से बहुत अधिक वर्षों तक जीता है। 2014 में आदिवासियों की मृत्यु के समय औसत उम्र 43 वर्ष, अनुसूचित जाति की 48 वर्ष, मुसलमान ओबीसी की 50 वर्ष और हिंदू ओबीसी की 52 वर्ष थी, जबकि इसी वर्ष उच्च जाति के लोगों (हिंदू व अन्य गैर-मुसलमान) की औसत उम्र 60 वर्ष थी। आश्चर्यजनक रूप से ऊंची जाति के मुसलमानों की औसत उम्र ओबीसी मुसलमानों से एक वर्ष कम थी।
    Notes:
    औसतन दलित स्त्री उच्च जाति की महिलाओं से 14.5 साल पहले मर जाती है। सर्वे के अनुसार, दलित महिलाओं की औसत आयु में 39.5 वर्ष थी जबकि ऊँची जाति की महिलाओं की 54.1 वर्ष। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उच्च जातियों के सभी लोग 60 वर्ष जीते हैं और बहुजन तबकों के 43 से 50 साल।
    Metadata:
    Published as:
    Journal article    
    Status:
    Published
    Last Updated:
    1 year ago
    License:
    Attribution-NonCommercial

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